इलाहाबाद का परिचय

इलाहाबाद अपने प्राचीन नाम प्रयाग से भी विख्यात है। यह भारत का दूसरा सबसे पुराना नगर है जो उत्तर प्रदेश में स्थित है। भारत के पवित्र ग्रंथों में इस नगर का उल्लेख है। यह नगर गंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम के लिए भी जाना जाता है जिसके लिए कई पर्यटक यहाँ आते हैं। कुम्भ मेले की मेजबानी के अलावा यह पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है जो भारत की समृद्वि को भी परिभाषित करता है। कुम्भ के दौरान या किसी और समय इलाहाबाद किले, पातालपुरी मंदिर, अशोक स्तम्भ, अक्षय वट, हनुमान मंदिर, शंकर विमान मंडप, मनकामेश्वर मंदिर, मिन्टो पार्क, स्वराज भवन, आनंद भवन, जवाहर तारामंडल, इलाहाबाद संग्रहालय, कंपनी बाग़, खुसरो बाग़ और मेमोरियल हाल आदि आकर्षण का केन्द्र हैं।

इन सभी स्थानों का आसन मार्ग आप इलाहाबाद नक्शे की मदद से ढूँढ सकते हैं। इसके माध्यम से बैंक, एटीएम, अस्पताल आदि सार्वजनिक सुविधाओं का पता भी लगाया जा सकता है।

प्रयाग इलाहाबाद में आर्यों द्वारा बनाया गया एक बहुत प्राचीन स्थल है जो पवित्र गंगा और यमुना के मिलन स्थल के पास स्थित है । यह नगर पूरे विश्व में सबसे बड़े धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात है। हर 12 वर्ष पर संगम हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है । यह ऐतिहासिक नगर भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन का केंद्र और नेहरु परिवार का घर रहा है । आज इलाहाबाद तेजी से वाणिज्यिक और प्रशासनिक नगर के रूप में आगे बढ़ रहा है ।

कुम्भ मेला

राक्षसों और देवताओ में जब अमृत के लिए लड़ाई हो रही थी तब भगवन विष्णु ने एक जादूगरनी ( मोहिनी ) का रूप लिया, और राक्षसों से अमृत को जब्त कर लिया । भगवान विष्णु ने गरुड़ को अमृत पारित कर दिया, और अंत में राक्षसों और गरुड़ के संघर्ष में कीमती अमृत की कुछ बूंदे इलाहाबाद, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में गिर गई । तब से प्रत्येक १२ साल में इन सभी स्थानों में कुम्भ मेला आयोजित किया जाता है।

अर्ध कुम्भ मेला ओर माघ मेला

अर्ध या आधा कुम्भ , हर छह वर्षो में संगम के तट पर आयोजित किया जाता है ।पवित्रता के लिए अर्ध कुम्भ भी पूरी दुनिया में लाखो श्रधालुओं को आकर्षित करती है । माघ मेला संगम पर आयोजित एक वार्षिक समारोह है ।