कुम्भ पर्व चक्र

कुम्भ पर्व विश्व मे किसी भी धार्मिक प्रयोजन हेतु भक्तो का सबसे बड़ा संग्रहण है । सैंकड़ो की संख्या में लोग इस पावन पर्व में उपस्थित होते हैं । कुम्भ का संस्कृत अर्थ है कलश, ज्योतिष शास्त्र में कुम्भ राशि का भी यही चिन्ह है । हिन्दू धर्म में कुम्भ का पर्व हर १२ वर्ष के अंतराल पर चारों में से किसी एक पवित्र नदी के तट पर मनाया जाता है- हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और इलाहाबाद में संगम जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं।

इलाहबाद का कुम्भ पर्व

ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार जब बृहस्पति कुम्भ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तब कुम्भ मेले का आयोजन किया जाता है। वर्ष २०१३ में १४ जनवरी से पूर्ण कुम्भ मेला इलाहाबाद में आयोजित किया जाएगा । प्रयाग का कुम्भ मेला सभी मेलों में सर्वाधिक महत्व रखता है

हरिद्वार के कुम्भ पर्व

हरिद्वार हिमालय पर्वत श्रृंखला के शिवालिक पर्वत के नीचे स्थित है । प्राचीन ग्रंथों में हरिद्वार को तपोवन, मायापुरी, गंगाद्वार और मोक्षद्वार आदि नामों से भी जाना जाता है। हरिद्वार की धार्मिक महत्‍ता विशाल है एवं यह हिन्दुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थान है । मेले की तिथि की गणना करने के लिए सूर्य, चन्द्र और बृहस्पति की स्थिति की आवश्यकता होती है। हरिद्वार का सम्बन्ध मेष राशि से है । पिछला कुम्भ मेला मकर संक्रांति (१४ जनवरी २०१०) से शाख पूर्णिमा स्नान(२८ अप्रैल २०१०) तक हरिद्वार में आयजित हुआ था । २०२२ में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुम्भ मेले के तिथि अभी निकालनी बाकी है ।

नासिक का कुम्भ पर्व

भारत में १२ में से एक जोतिर्लिंग त्र्यम्बकेश्वर नामक पवित्र शहर में स्थित है । यह स्थान नासिक से ३८ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और गोदावरी नदी का उद्गम भी यहीं से हुआ । १२ वर्षों में एक बार सिंहस्थ कुम्भ मेला नासिक एवं त्रयम्बकेश्वर में आयोजित होता है । ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार नासिक उन चार स्थानों में से एक है जहाँ अमृत कलश से अमृत की कुछ बूँदें गिरी थीं। कुम्भ मेले में सैंकड़ों श्रद्धालु गोदावरी के पावन जल में नहा कर अपनी आत्मा की शुद्धि एवं मोक्ष के लिए प्रार्थना करते हैं । यहाँ पर शिवरात्रि का त्यौहार भी बहुत धूम धाम से मनाया जाता है

उज्जैन का कुम्भ पर्व

उज्‍जैन का अर्थ है विजय की नगरी और यह मध्य प्रदेश की पश्चिमी सीमा पर स्थित है । इंदौर से इसकी दूरी लगभग ५५ किलोमीटर है । यह शिप्रा नदी के तट पर बसा है । उज्जैन भारत के पवित्र एवं धार्मिक स्थलों में से एक है । ज्योतिष शास्‍त्र के अनुसार शून्य अंश ( डिग्री) उज्जैन से शुरू होता है । महाभारत के अरण्य पर्व के अनुसार उज्जैन ७ पवित्र मोक्ष पुरी या सप्त पुरी में से एक है । उज्जैन के अतिरिक्त शेष हैं अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांचीपुरम और द्वारका । कहते हैं की भगवन शिव नें त्रिपुरा राक्षस का वध उज्जैन में ही किया था।