एक अनंत स्मृति

प्रयाग में गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर लगा इस सदी का दूसरा महाकुम्भ मेला महाशिवरात्रि मार्च 10, 2013 को हुए स्नान पर्व के साथ संपन्न हो गया। मकर संक्रांति जनवरी 14 को हुए प्रथम स्नान के बाद 55 दिनों तक चले आस्था संस्कृति के इस महान पर्व में देश विदेश से आये लगभग 12 करोड़ श्रद्धालुओं और तीर्थ यात्रियों ने भाग लिया।

प्रयाग का कुम्भ सिर्फ एक मेला या धार्मिक आयोजन ही नहीं, देश के सांस्कृतिक परिदृश्य का एक सजीव चित्रण है। यहाँ आये श्रद्धालुओं के लिए संगम में डुबकी लगाना करना स्नान करने से अधिक अपनी आस्था को जीवित रखने का और एक महान शक्ति में अपनी श्रद्धा पुनः स्थापित करने का एक उपक्रम है। इस वर्ष का कुम्भ मकर संक्रान्ति (जनवरी 14, 2013) को प्रारंभ हुआ और प्रमुख स्नान पौष पूर्णिमा (जनवरी 27), मौनी अमावस्या (फरवरी 10), बसन्त पंचमी (फरवरी 15), माघी पूर्णिमा (फरवरी 25) और महाशिवरात्रि (मार्च 10) को संपन्न हुए।

इसके अलावा अन्य दिनों पर भी लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम के दर्शन किये और स्नान लाभ उठाया। इलाहाबाद में महाकुंभ मेला 12 साल बाद लगा था। इस पूरे पर्व के दौरान दुनिया के कोने कोने से आये साधु, विशेषकर नागा साधु, अनेक अखाड़े, तथा धार्मिक अनुष्ठान लोगों के कौतुहल और श्रद्धा के केंद्र बने रहे। जनकल्याण के लिए अनेक धार्मिक अनुष्ठान भी हुए, बेटी, गाय, गंगा, यमुना के साथ शास्त्रों को बचाने की आवाज भी बुलंद हुई। उत्तर प्रदेश शासन के कुम्भ मेला प्रशासन के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों ने दिन रात एक कर के इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।