तीर्थराज प्रयाग

तीर्थराज प्रयाग धार्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से अति-महत्वपूर्ण है। इसने हमारी भारतीय सभ्यता को सम्भाल कर रखा है ।यह आत्मज्ञान और ज्ञान प्राप्ति का उत्तम स्थान है। यह मानव प्रेम की शिक्षा देता है ।ऐसा माना जाता है कि ब्रम्हदेव ने ब्रह्माण्ड के निर्माण से पूर्व पर्यावरण को शुद्ध करने के लिए यज्ञ यहीं किया इसीलिए इसका नाम प्रयाग पड़ा ।प्रयाग का अर्थ होता है 'शुद्धिकरण का स्थान '। ब्रिटिश शासन के दौरान प्रयाग में प्रांतीय कार्यालय,उच्च न्यायलय स्थापित किये गये। उन दिनों प्रयाग सामाजिक, बौद्धिक और राजनितिक गतिविधियों का केंद्र था ।प्रयाग का स्वतंत्रता की लड़ाई में भी विशेष योगदान रहा है। प्रयाग की भूमि अमरों की भूमि है ।

प्रयाग का अत्यधिक धार्मिक महत्व है और तीर्थ के राजा के रूप में जाना जाता है, तीन पवित्र नदियों प्रयाग के संगम पर स्थित होने की वजह से इसमें छह घाट हैं। दो घाट गंगा के तट पर, दो यमुना के तट पर और दो घाट संगम तट पर बने हुए हैं। संगम के पश्चिम में धिर्त्य-कुलिया और मधु-कुलिया स्थित हैं। इससे आगे निरंजन तीर्थ और औदित्य तीर्थ स्थित हैं ।शिशिर मोचन और परशुराम तीर्थ किले के नीचे हैं। सरस्वती नदी का स्थान इसे ही माना जाता हैं। गौघाट का अपना विशेष महत्व है। बहुत से लोग इस स्थान पर स्नान करने के बाद गौ दान करते हैं। इससे कुछ आगे कपिल-तीर्थ है जो कि सम्राट कपिल के द्वारा निर्मित किया गया था। यही पर इन्देश्वर शिव, तारकेश्वर कुन्ड, और तारकेश्वर शिव मंदिर भी हैं।

दशमेश घाट के पश्चिम में लक्ष्मी-तीर्थ है इसके दक्षिण में महादेवी-तीर्थ है और पास में उर्वशी-तीर्थ एवं उर्वशी कुन्ड हैं। ऐसी मान्यता है कि अप्सरा उर्वशी यहाँ स्नान करती थी। त्रिवेणी के उस पर अग्निकर है, सोमेश्वर-महादेव और सोम तीर्थ भी यही हैं।

प्रयागराज माधो मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। १२ माधो मंदिर विभिन्न स्थानों पर स्थित हैं नीचे दिए गए हैं: -

  • साहेब माधो: त्रिवेणी के पूर्व में यह चातानागा बगीचे में स्थित है जो व्यासजी के स्थान पर है। शिवपुराण यहीं लिखा गया था ।
  • अद्वेनी माधो :यह दारागंज में रामचरणअग्रवाल की कोठी के पास स्थित है। लक्ष्मीनारायण जी की मूर्ति यहाँ है ।
  • मनोहरमाधो: दर्वेश्वरनाथ के मंदिर में, भगवान विष्णु की एक मूर्ति है जिन्हें मनोहर माधो कहा जाता है।
  • चारा माधो :अग्निकोर-अरैल में स्थित है।
  • गदामाधो: छेओकी रेलवे स्टेशन के पास स्थित है।
  • आदम माधो: - देवरिया गांव में स्थित है।
  • अनंतमाधो: - खुल्दाबाद से लगभग दो मील दूर
  • बिंदुमाधो: द्रौपदी घाट के आसपास के क्षेत्र में स्थित है।
  • अशी माधो: - नाग्बसुकी के पड़ोस में स्थित है।
  • संकटहरण माधो: - संध्या वट के नीचे स्थित है।
  • विष्णुयाअध् माधो: - अरैल में स्थित है।
  • वटमाधो: - अक्षयवट के निकट स्थित है।